आध्यात्मवाद संस्कृति की देन है आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति : राज्यपाल

देश हिमाचल
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    शिमला    26 मई, 2019
आयुर्वेद में अधिक अनुसंधान की आवश्यकता पर दिया बल
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति आध्यात्मवाद संस्कृति की देन है, जिस पर आज अधिक अनुसंधान की आवश्यकता है ताकि इसका लाभ व्यापक स्तर पर मिल सके।
राज्यपाल आज कुरुक्षेत्र के मल्टी आर्ट सेंटर में अखिल भारतीय आयुर्वेद विशेष (स्नातकोत्तर) संगठन के हरियाणा चैप्टर द्वारा ‘‘मस्क्युस्कैलेटल डिस्ऑडर्र’’ पर 41वें राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे। इस सम्मेलन में करीब 1000 प्रतिभागियों ने भाग लिया और विभिन्न संस्थानों के स्नातकोत्तर शोधार्थियों ने 185 शोधपत्र प्रस्तुत किए।
उन्होंने कहा कि भारतीय ऋषियों ने हजारों वर्ष पहले मानव के स्वास्थ्य के दृष्टिगत चिकित्सा पद्धति की रचना की, जो जीवन शैली का एक हिस्सा थी। जीवन का मूल उद्देश्य धर्म, अर्थ, काम को करते हुए मुक्ति को प्राप्त करना है, जिसका पहला आधार ही स्वस्थ शरीर का होना है। अस्वस्थ व्यक्ति बुद्धिमान होते हुए भी समाज में योगदान नहीं कर पाता है। स्वस्थ शरीर ही सकारात्मक सोच से विश्व का मार्गदर्शन कर सकता है। अखिल भारतीय आयुर्वेद विशेष (स्नातकोत्तर) संगठन इस चिकित्सा पद्धति को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
आचार्य देवव्रत ने कहा कि आयुर्वेद का जन्म भारत की धरती पर हुआ और यह विश्व की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति है। लेकिन, एलोपैथी की तरह इस पर व्यापक अनुसंधान नहीं हुआ। संपूर्ण मानव को जो लाभ इस चिकित्सा पद्धति से मिलना था, वह उससे वंचित रह गया। उन्होंने युवा चिकित्सकों से इस पर गहन अनुसंधान की आवश्यकता पर बल दिया। हालांकि, जिन ऋषि-मुनियों ने इस चिकित्सा पद्धति को दिया उनका शोध आध्यात्मवाद पर टिका था और वह इतना स्टीक था कि जो गुण किसी औषधि में मिलते थे वह आज भी प्रयोगशाला में उतने ही गुणों के साथ उपलब्ध है।
राज्यपाल ने कहा कि यह जीवनदायिनी चिकित्सा पद्धति पंचतत्वों को आधार बनाकर प्रकृति से बनी है, जिसके कोई साईड इफैक्ट्स नहीं है। उन्होंने आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के विस्तार पर बल दिया।
इससे पूर्व, राज्यपाल ने आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के क्षेत्र मे उत्कृष्ट कार्य कर रहे चिकित्सकों को भी सम्मानित किया। उन्होंने संगठन की स्मारिका का विमोचन भी किया।
कार्यक्रम निदेशक डॉ. बलबीर सिंह संधू तथा आयोजन सचिव डॉ. राजा सिंघला ने राज्यपाल का स्वागत किया।

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