मुख्यमंत्री ने किया नीदरलैंड में निवेशकों से समर्थन का आह्वान,आठ सौ करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित

देश हिमाचल
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शिमला                15 जून, 2019

मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने राज्य सरकार एवं भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के सहयोग से नीदरलैंड के द हेग में आयोजित दूसरे अंतर्राष्ट्रीय ‘रोड-शो’ में शुक्रवार सांय अपने सम्बोधन में हिमाचल के मजबूत पहलुओं, ध्यानपूर्वक बनाई गई नीतियों, उपयुक्त अवसरों एवं राज्य की निवेश को प्रोत्साहित करने की तत्परा के बारे में जानकारी दी।  

जय राम ठाकुर ने कहा कि नीदरलैंड विश्व में कृषि उत्पादों का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है और यह अपनी स्मार्ट लॉजिस्टिक्स, भण्डारण एवं पैकिंग तकनीकों के लिए जाना जाता है, जिससे खाद्य पदार्थ अधिक समय तक ताजा रखे जा सकते हैं, जो कृषि में सहयोग को प्रमुख क्षेत्र बनाता है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में व्यापार सहयोग से दोनों देशों को लाभ होगा और सरकार के खाद्य उत्पादन एवं किसानों की आय को दोगुना करने के प्रयासों को बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि पूरा विश्व जानता है कि नीदरलैंड के पास इसे सम्भव बनाने के लिए तकनीकें हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सेब के बागीचों के नवीकरण के लिए हर सम्भव बजट प्रावधान एवं अन्य कोशिशे कर रही है, लेकिन राज्य में नीदरलैंड की तरह सेब की पैदावार नहीं की जा रही है। नीदरलैंड में सेब के पेड़ों से हिमाचल के मुकाबले पांच गुना अधिक पैदावार होती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छ एवं शान्त वातावरण, सांस्कृतिक विविधता के कारण हिमाचल भारत का ऐसा राज्य है जहां सबसे अधिक पर्यटक भ्रमण करने आते हैं। उन्हांने कहा कि निवेशकों के लिए पर्यटन क्षेत्र में निवेश करने की व्यापक सम्भावना उपलब्ध है। स्किंग, ईको पर्यटन, स्की रिजॉर्ट विकास जैसे साहसिक पर्यटन से जुड़े क्षेत्रों में निवेश की व्यापक सम्भावनाएं है।

सम्भावित उद्यमियों को प्रदान किए जा रहे निवेश अवसरों के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार औद्योगिक नीति के तहत प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए आकर्षक प्रोत्साहन प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि नीति में संशोधन कर इसे और आकर्षक और उद्योग अनुकूल बनाया गया है। उन्होंने कहा कि पर्यटन, आयुष, सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलैकट्रॉनिक्स, जल विद्युत, खाद्य तथा फल प्रसंस्करण इत्यादि जैसे क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए नई औद्योगिक नीति पर विशेष बल दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार नीदरलैंड के साथ व्यापार करने की इच्छुक है, क्योंकि डच की अर्थव्यवस्था खुले विचार की है और यह अन्तरराष्ट्रीय व्यापार पर बहुत विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि नीदरलैंड यूरोपिय संघ के सभी भारतीय निर्यातों में से 20 प्रतिशत से अधिक के लिए प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है। उन्होंने कहा कि वह आश्वस्त है कि भविष्य में देश यूरोपिय संघ के साथ भारत की व्यापार वार्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

जय राम ठाकुर ने कहा कि नीदरलैंड की शैल, यूनिलीवर आईएनजी, अपोलो, आईकेईए, फिलिप्स, एगॉन, हेनेकेन जैसी 115 से अधिक कम्पनियां भारत में पहले से ही मौजूद है और देश नीदरलैंड की कम्पनियों के बीपीओ के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान बन कर उभरा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके नीदरलैंड के समकक्ष मार्क रूट्टे ने मई, 2018 में कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, प्रौद्योगिकी, स्मार्ट सिटी, साईबर सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा तथा वित्त क्षेत्र में 50 से अधिक समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए थे। पिछले वर्ष नीदरलैंड के प्रधानमंत्री के भारत के प्रवास के दौरान दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य, जल, ऊर्जा तथा कृषि क्षेत्रों से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए अनेक नवीन कार्यक्रमों की शुरूआत हुई थी।

जय राम ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार 2019 में धर्मशाला में विश्व स्तरीय ग्लोबल इन्वेस्टर मीट का आयोजन कर रही है। इस आयोजन के माध्यम से हिमाचल भारतीय राज्य में एक शीर्ष राज्य बन कर उभरेगा। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य हिमाचल प्रदेश को दुनिया के सामने निवेश अवसरों वाले राज्य के रूप में स्थापित करना है।

इससे पूर्व राज्य सरकार ने यूरोप के वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (एसोचेम) के साथ नीदरलैंड में वहां के एसोचेम के अध्यक्ष डॉ. विकास चतुर्वेदी के माध्यम से समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस ज्ञापन के माध्यम से कृषि, बागवानी, लोजीस्टिक एवं अधोसंरचना को अधिक मिलेगा। एसोचेम यूरोप, भारत एवं यूरोप के मध्य होने वाले व्यापार को सुगम बनाता है।

राज्य सरकार ने सी.एम. कार्पस के साथ पांच सौ करोड़ रुपये का समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया। इस ज्ञापन के फलस्वरूप कांगड़ा जिला में गॉल्फ रिजॉर्ट का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना का आरंभ वर्ष 2020 के जनवरी माह में सम्भावित है तथा इसके माध्यम से एक हजार से अधिक व्यक्तियों को रोजगार सुलभ होगा।

इसके अतिरिक्त प्रदेश सरकार ने हिमाचल के कांगड़ा जिला में अंतर्राष्ट्रीय कौशल विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए तकशिंदा फाउन्डेशन के साथ तीन सौ करोड़ का समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया। इस परियोजना की शुरूआत जनवरी, 2020 में संभावित है।

उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने उपस्थित लोगों का अभिवादन किया। उन्होंने हिमाचल की निवेश आकर्षित करने की तैयारी के बारे में जानकारी दी तथा बताया कि हिमाचल ने 50 हजार से अधिक उत्पादन ईकाइयों के माध्यम से एक उत्पादन अर्थव्यवस्था के रूप में उभरने के लिए सार्थक पग उठाए हैं जिसके माध्यम से 4 लाख से अधिक लोग रोजगार प्राप्त कर रहे है। प्रदेश सरकार ने राज्य में निवेशकों/उद्योगों के लिए ढांचागत, केन्द्रित तथा व्यापक तरीके से एक स्थान पर सभी सुविधाएं तथा पूर्ण सहयोग करने वाले ‘निवेश, प्रोत्साहन एवं सुविधा केन्द्र (आईपीएफसी)’ बनाया है।

नीदरलैंड में भारत के राजदूत वेणु राजामोनी ने कहा कि भारत के हिमाचल प्रदेश में अपार क्षमता है और अनेक लाभ मिल रहे है तथा देश के युवा मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर का दृढ़ एवं गतिशील राजनीतिक नेतृत्व मिला है। उन्होंने एक स्थिर सरकार तथा सक्रिय प्रशासन, अनुकूल औद्योगिक वातावरण को बढ़ावा देने, विदेशी निवेश को आकर्षित करने तथा प्रदेश को आर्थिक प्रगति के पथ पर अग्रसर करने का आश्वासन दिया। उन्होंने केन्द्र सरकार द्वारा प्रदेश सरकार को दिए जाने वाले सहयोग के बारे भी अवगत करवाते हुए बताया कि केन्द्र और प्रदेश में एक ही राजनीतिक पार्टी की सरकार हे।  

अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं मुख्यमंत्री ने प्रधान सचिव डॉ. श्रीकांत बाल्दी ने इस अवसर पर पर्यटन तथा रियल एस्टेट के क्षेत्र में निवेश के अवसरों पर एक संक्षिप्त प्रस्तुति दी। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में पर्यटन के क्षेत्र में साहसिक गतिविधियों, ट्रेकिंग एवं कैपिंग, वन्य-जीवन, अनछुए शीत रेगिस्तान, इतिहास, वस्तुशील्प, अध्यात्म तथा सौहार्द जैसी गतिविधियों में अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने पांच सितारा रिसॉर्ट, स्की रिसॉर्ट, ईका पर्यटन, कनवेंशन सैंटर, हॉट वॉटर वैलनैस रिसॉर्ट, स्काई ब्रिज, लेक पर्यटन, गंतव्य विकास, रोप-वे, नागरिक उडड्यन, चाय पर्यटन तथा टेनटिड अकॉमोडेशन जैसे व्यक्तिगत् निवेश संभावित परियोजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में व्यापक मांग, अनुकूल वातावरण तथा दृढ़ सहयोग के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों के लोगों का शिमला, सोलन, धर्मशाला तथा पालमपुर जैसे मध्य पहाड़ी क्षेत्रों में रुचि के कारण राज्य के रियल एस्टेट में निवेश करना श्रेष्ठ क्षेत्र है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग मनोज कुमार ने एक संक्षिप्त प्रस्तुति दी, जिसमें उन्होंने बताया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में क्यों भारत का उज्ज्वल स्थान है तथा हिमाचल प्रदेश किस प्रकार निवेशकों के लिए एक आर्दश गंतव्य है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में 8 केन्द्रित क्षेत्रों पर संक्षिप्त में जानकारी दी। उन्होंने ‘ईज ऑफ डुईंग बिजनेस’ के संदर्भ में राज्य की तैयारी पर प्रकाश डाला और औद्योगिक निवेश नीति-2019 के प्रमुख प्रोत्साहनों को भी सांझा किया।

अलाईंस फॉॅम्युलेशनस के सीईओ अनिल नागपाल तथा माइक्रोटेक इंटरनेशनल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सुबोध गुप्ता सहित व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने हिमाचल प्रदेश में अपने सकारात्मक निवेश अनुभवों को सांझा किया।

निदेशक उद्योग हंस राज, विशेष सचिव आबिद हुसैन सादिक, मुख्यमंत्री के प्रधान निजि सचिव विनय सिंह, सीआईआई हिमाचल के प्रतिनिधि तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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