हिमाचल प्रदेश वक्फ बोर्ड में सरकारी पैसों का दुरुपयोग बोर्ड के रखवाले कर रहे बोर्ड को कंगाल विभाग से ली गई आरटीआई में हुआ खुलासा

हिमाचल
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हिमाचल प्रदेश में नई सरकार का गठन होने के तुरंत बाद साल फरवरी माह में नए वक्फ बोर्ड का गठन किया गया और अब तक बोर्ड की चार बैठकें हुई है। जिनमें शामिल होने के लिए बोर्ड के सदस्यों को यात्रा भत्ता दिया जाता है। गौरतलब हो कि जिस पर विभाग द्वारा बहुत अधिक खर्चा किया गया है इतना ही नहीं अधिकारियों द्वारा बोर्ड के सदस्यों को और अधिक लाभ पहुंचाने के लिए बोर्ड के सदस्य को दिया जा रहा यात्रा भत्ता भी वास्तव में कहीं अधिक है। विभाग से ली गई आरटीआई में बोर्ड के एक सदस्य का पता गांव बिंदला डाकघर चांदपुर जिला बिलासपुर से शिमला मुख्य कार्यालय तक की एकतरफा दूरी को 150 किलोमीटर बताया गया है। जबकि वास्तव में 100 किलोमीटर से कम है। जिसकी पुष्टि हिमाचल पथ परिवहन निगम से प्राप्त आरटीआई द्वारा हुई है। आरटीआई में बताया गया पता बिंदला नामक गांव डाकघर चांदपुर सही नहीं है वास्तव में यह चकली नामक गांव है जो कि डाकघर चांदपुर के अंतर्गत आता है और बोर्ड के एक अन्य सदस्य जिनका हिमाचल सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन में पहले इमाम ओल्ड बैरियर मस्जिद शिमला बताया गया है वह वास्तव में ओल्ड शिमला में भी कार्यरत हैं लेकिन आरटीआई आवेदन करने के बाद उनका पता 24 सितंबर 2018 को बदलवा कर गांव कोटली गिरवा तहसील चौपाल जिला शिमला करवा दिया गया लेकिन ज्ञात रहे की मांगी गई आरटीआई में बोर्ड की 4 बैठकों का हवाला दिया गया है जो कि सितंबर महीने से पहले हुई है लेकिन पहले से ही उनको उनके पैतृक गांव नेरवा से शिमला तक का यात्रा बता दिया गया है और नेरवा से शिमला मुख्य कार्यालय तक की एकतरफा दूरी 145 किलोमीटर बताया गया है बता दें कि आरटीआई में विभाग में सदस्य क्यों पर हो रहे खर्च से संबंधित और भी सवाल पूछे गए हैं लेकिन जिनका जवाब वक्फ बोर्ड के जन सूचना अधिकारी द्वारा बोर्ड के सदस्यों का बचाव करते हुए अधूरे हुआ घुमा फिरा कर दिए गए हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ छेड़ने वाली हिमाचल प्रदेश सरकार में सरकारी अधिकारियों द्वारा ही भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है जिन से आए दिन खर्चे में रहने वाला वक्फबोर्ड विभाग एक बार फिर से घोटालों के घेरे में आ खड़ा हुआ है। क्योंकि जहां एक छोटा अौधा रखने वाले बोर्ड के सदस्यों को इतना अधिक लाभ पहुंचाया जा रहा है। वहां इन सब के पीछे विभाग के उच्च अधिकारियों को अध्यक्ष महोदय का मुनाफा भी होने का अनुमान लगाया जा रहा है। जिसकी निष्पक्ष जांच करवाई जाना अनिवार्य है। इसमें लिप्त लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि राज्य की दर को बचाया जा सके।

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