बीजेपी नगर निगम शिमला मे सत्तासीन हुई है इसमे बेरोकटोक भ्र्ष्टाचार बढ़ा

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1 दिसम्बर 2019 भारत की कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) की जिला कमेटी नगर निगम शिमला में चल रहे व्यापक भ्रष्टाचार को लेकर नगर निगम प्रशासन बिल्कुल भी संजीदा न होने का आरोप लगाती है और जब से बीजेपी नगर निगम शिमला मे सत्तासीन हुई है इसमे बेरोकटोक भ्र्ष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिसके ज्वलंत उदाहरण खलीनी पार्किंग में हुआ भ्र्ष्टाचार व घोटाला तथा जल विभाग का सामान कबाड़ में सस्ते भाव पर बेचना आदि प्रमुख हैं।
खलीनी पार्किंग में हुए घोटाले का पता चले नगर निगम प्रशासन को दो दिन से अधिक समय हो गया है और पिछले कल नगर निगम की मासिक बैठक में भी सी.पी.एम. की पार्षद ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया था परन्तु इस पर नगर निगम प्रशासन अभी तक मौन है और इतना समय बीतने के पश्चात भी आज तक इसके लिए जिम्मेवार लोगों के विरुद्ध कोई FIR दर्ज नही की गई है। जिससे स्पष्ट हो जाता है कि नगर निगम प्रशासन सरकार व सत्ता पक्ष के भारी दबाव में कार्य कर रहा है।
खलीनी पार्किंग में तो भ्र्ष्टाचार यहाँ से स्पष्ट हो जाता है कि जब करीब तीन वर्ष पूर्व इस पार्किंग का ठेका समाप्त हो गया था तो इसका दोबारा टेंडर क्यों नहीं किया गया और ठेका समाप्त होने के पश्चात उक्त ठेकेदार से यह पार्किंग नगर निगम में अपने कब्जे में लेकर स्वयं क्यों नहीं चलाई गई जैसा कि और पार्किंग में भी किया जाता रहा है। उक्त ठेकेदार किसकी इजाजत से इसमे नगर निगम के नाम की पर्ची पार्किंग के लिए काटता रहा और लाखों रुपए गैर कानूनी तरीके से इस पार्किंग से कमाई कर जनता व नगर निगम के साथ ठगी करता रहा है। ठेकेदार ने पिछले तीन वर्षों में लाखों रुपए गैर कानूनी तौर पर ऐंठ कर नगर निगम व जनता के साथ ठगी की है और नगर निगम की संपत्ति पर गैर कानूनी कब्जा किया है। जिस पर उक्त दोषियों पर तुरंत FIR कर कानूनी कार्यवाही की जानी चाहिए थी परन्तु न जाने किसके दबाव में आकर नगर निगम प्रशासन इस मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है। इस पार्किंग के कब्जाधारी के विरुद्ध जब कार्यवाही करने हेतू गए नगर निगम के कर्मचारियों के साथ किया गया दुर्भाग्यपूर्ण बर्ताव से स्थानीय पार्षद की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में आई है, जिसकी जांच की जानी भी आवश्यक है क्योंकि नगर निगम के चुने हुए हर प्रतिनिधि की वैधानिक जिम्मेदारी है कि वह नगर निगम की संपत्ति की रक्षा करें।
बीजेपी के कई पार्षद भी भ्र्ष्टाचार को लेकर कई बार नगर निगम की कार्यप्रणाली पर प्रशन उठा चुके है। चाहे बिना टेंडर चेहतों को ठेका देने का मुद्दा हो या जल विभाग के सामान को कबाड़ में बेचने का मुद्दा हो कई बार सदन में उठाया गया है परन्तु इन मुद्दों पर नगर निगम प्रशासन कोई भी कार्यवाही नहीं कर रहा है जिससे नगर निगम की मंशा संदेह के घेरे में आती है या ऐसा प्रतीत होता है कि वह सरकार व सत्ता के करीबी लोगों के दबाव में कार्य कर रहा है। यूह इससे भी स्पष्ट जाता है कि जिस प्रकार से नगर निगम के कर्मचारियों पर सत्ता के करीबी लोगों के द्वारा नाजायज़ कार्य करने का दबाव बनाया जाता है और इनके मनमाफिक कार्य न करने पर इनको डराया धमकाया जाता है जिसका जीता जागता उदाहरण खलीनी पार्किंग प्रकरण है।
सी.पी.एम. सरकार से मांग करती है कि नगर निगम शिमला में चल रहे भ्र्ष्टाचार को रोकने के लिए खलीनी पार्किंग घोटाले में संलिप्त व इनको संरक्षण देने वालों के विरुद्ध तुरन्त FIR दर्ज करने के आदेश नगर निगम प्रशासन को दे। नगर निगम में भ्र्ष्टाचार से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी जांच बैठा कर इनके लिए दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही के आदेश नगर निगम प्रशासन को दे ताकि जनता के पैसों का दुरुपयोग रोका जा सके और इसे जनहित मे शहर के विकास के लिए इस्तेमाल किया जा सके। यदि नगर निगम खलीनी पार्किंग के घोटाले के लिए दोषियों के विरुद्ध FIR दर्ज नहीं करती है व भ्र्ष्टाचार से जुड़े अन्य मामलों की निष्पक्ष जांच नहीं कि जाती तो सी.पी.एम. नगर निगम में चल रहे इस भ्र्ष्टाचार के विरुद्ध जन आंदोलन चलाएगी।

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