भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है । लोकतंत्र की नीव मताधिकार पर रखी जाती है । युवा हो या बुजुर्ग, गरीब या अमीर, अगड़ा हो या पिछड़ा तथा दलित हो या कोई और सभी के मतों का एक समान मूल्य है। विविधता में एकता व सभी के मतों का समान महत्व के साथ- साथ सरकारों के गठन में सब की समान भागीदारी भारतीय गणतंत्र की खूबसूरती एवं ताकत का परिचायक है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया किसी उत्सव से कम नहीं। विधायिका की मजबूती राष्ट्र की दिशा और दशा को तय करती है। सर्वविदित हैं कि हमें वोट का अधिकार व अपनी सरकार चुनने के अवसर देने के लिए लाखों वीर -वीरांगनाओं ने अपनी शहादत दी। असंख्य कुर्बानियां के बाद मिले इस अधिकार का अगर हम प्रयोग न करें तो निश्चित तौर पर उन शहीदों के साथ अन्याय होगा । मजबूत लोकतंत्र हर राष्ट्र की प्रगति का मार्ग सुनिश्चित करता है । लोकतंत्र के प्राण मतदान में निहित है अतः जितनी अधिक संख्या में मतदान में हमारी भागीदारी होगी, लोकतंत्र उतना ही मजबूत होगा। जिस तरह फ्रांस में एक वोट के कारण ही लोकतंत्र की स्थापना हो सकी उसी प्रकार मात्र एक वोट के कारण ही हिटलर जर्मनी के सत्ता पर काबिज हुआ। अतः आपका एक मत देश व प्रदेश की भाग्य रेखा खींचेगा। जिस प्रकार जमीन पर डाला हुआ छोटा सा वट वृक्ष का बीज जल के योग से बढ़ता है ठीक उसी प्रकार जनतंत्र का पुण्यवृक्ष भी मत रूपी दान से एक मजबूत स्तंभ बनता है । राष्ट्र के नाम मतदान के रूप में दिया गया दान सबसे बड़ी देश भक्ति एवं पुरुषार्थ है । किसी भी प्रकार के दान के महत्व को भारतीय जनमानस से अधिक कोई नहीं समझ सकता, जिसमें भय , भेदभाव, स्वार्थ, प्रतिफल और नफरत की कोई गुंजाइश नहीं । विश्व के समक्ष अपनी जागरुकता और समझदारी को प्रदर्शित करने का यह सबसे उपयुक्त समय एवं अवसर होता है । लोकतंत्र के महापर्व के प्रति आपकी दृढ़ आस्था और विश्वास राष्ट्र को नई दिशा प्रदान करेगा । वोट का अधिकार शहीदों की अमानत है । अतः सभी मतदाता 12 नवंबर 2022 को अहम, वहम, निद्रा व निंदा को त्याग कर न केवल स्वयं अपितु अपने परिवार व पड़ोसियों सहित मत का प्रयोग कर एक मजबूत लोकतंत्र के योद्धा बन राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें । आप की सक्रिय भागीदारी से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जा सकती है ।अन्यथा आज के दौर में जो तटस्थ हैं निश्चित तौर से समय उनका भी अपराध लिखेगा। वोट एक अधिकार नहीं शक्ति है जिसका प्रयोग अवश्य करें। प्रत्येक नागरिक को अपने अमूल्य मत की शक्ति से परिचित नहीं होगा, तब तक उसका सही ढंग से नहीं कर पाएगा। मतदान वाले दिन को मात्र छुट्टी का दिन कह कर अपनी जिम्मेदारी से न भागे । आओ सर्वाधिक मतदान कर अपने मतदान केंद्र को एक जागरूक केंद्र बनाकर उसे नई पहचान दें ।
मतदाता तू अपनी शक्ति पहचान
देश के भविष्य के लिए कर मतदान।
योग्य देशभक्त का कर चयन
यही होगा लोकतंत्र का सच्चा सम्मान।
परम देव शर्मा