शिमला 16 जून 2025। राजधानी शिमला में हिमाचल पथ परिवहन निगम की बसें दिन प्रतिदिन थकी मांदी सी लग रही है। हालांकि परिवहन के बेड़े में हजारों बसें खड़ी है। पता नहीं क्यों व्यवस्था चरमरा रही है। आए दिन पता चलता है कि किसी न किसी जगह पर बस खड़ी है। विभाग में खराब बसों को ठीक करने के लिए जरूरत के हिसाब से मिस्त्री भी हैं। लेकिन वर्कशॉप में स्पेयर पार्ट पुर्जे नहीं है। पता नहीं क्यों इस विभाग में किसी का ध्यान नहीं है। सरकार ने जनता पर तो किराए का बोझ डाल दिया है जनता ईमानदारी से बढ़ा हुआ किराया दे रही है। लेकिन उस हिसाब से सेवाएं नहीं मिल रही। आजकल राजधानी शिमला में जाम लग रहा है। कोई भी व्यक्ति अपने स्थान पर नहीं पहुंच पा रहा है। इसी तरह शाम को भी जाम के कारण आधा से पौना घंटा घर लेट पहुंच रहे हैं। पर्यटक भी हजारों की तादाद में राजधानी शिमला पहुंच रहे हैं। स्थानीय जनता 10 से 15 किलोमीटर तक बसों में खड़े होकर सफर कर रही है। परिवहन विभाग के मंत्री व उप मुख्यमंत्री क्या बने कि उन्होंने आज तक परिवहन विभाग की सुध तक नहीं ली। मैंने आज तक स्थानीय शिमला में परिवहन मंत्री को जनता की समस्याओं को सुनते नहीं देखा। ऊपर से सरकार घाटे में चल रहे रूटों को निजी करने का फैसला कर रही है। केंद्रीय विभाग में कार्यरत एक यात्री जो की पट्टा बरौरी से आते हैं। उनका कहना है कि हमारी बस शिमला-3 न. पिछले कई सालों से फायदे में चल रही है लेकिन इन दिनों यह बस भी जगह-जगह खराब खड़ी रहती है। जब अड्डा प्रभारी से बात होती है तो उनका कहना है कि बसों में लगने वाले पुर्जे वर्कशॉप में अवेलेबल नहीं है। जिसकी वजह से अधिकतर रुट बंद पड़े हैं। शिमला तीन नंबर के RM से आए दिन नोक झोंक होती रहती है। वैसे तो बेड़े में बसें बहुत है लेकिन खराब अधिकतर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बसों के घाटे में चलने का मुख्य कारण है कि स्थानीय ड्राइवर कंडक्टरों को अन्य रुटों पर भेजा जाता है जिसकी वजह से रूट घाटे में चल रहे हैं। वहीं उन्होंने आगे कहा कि हमारे गांव के ड्राइवर कंडक्टर जो की सेवानिवृत हुए हैं। राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित है। उन्होंने अपना पूरा जीवन इस विभाग में लगाया और सेवा निवृत्त हुए। लेकिन अभी तक विभाग उनके डयूज़ देने में असमर्थ है।