*वन्यप्राणीयों के संरक्षण एवं वन संपदा की चोरी रोकने के लिए वन्यप्राणी परिक्षेत्र सांगला के लिए बढ़ाई रात्रि गश्त।*

वन्यप्राणी मंडल सराहन के अंतर्गत वन्यप्राणी परिक्षेत्र सांगला ने रकछम छितकुल वन्यजीव अभ्यारण्य स्थल में सर्दी के मौसम में वन काटुओं और शिकारियों पर नजर रखने के लिए रात्रि गश्त

बढ़ा दी है। वन विभाग की टीमें देर रात तक पेट्रोलिंग करके जंगलों के आसपास होने वाली सभी गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। इसमें सड़कों पर रात को गुजरने वाले सभी वाहनों की चेकिंग की जा रही है जिससे कोई भी व्यक्ति रात के अंधेरे में वन्यप्राणियों को नुकशान एवं वन संपदा को चोरी करके न ले जा सके। इसमें वन्यप्राणी परिक्षेत्र सांगला की टीमें बसों से लेकर छोटे वाहनों पर भी नजर रख रही हैं। रकछम, मस्तरंग , छितकुल , नागस्ति, दुमती , खरोगला, बटशेरी , डोंजे ,कलिकुटंग , बारदा, शिसुंग, कुप्पा सहित अन्य वन्यप्राणी परिक्षेत्र सांगला के दायरे में आने वाली जगह वन्यप्राणी प्रभाग वन विभाग की टीमें रात को रोजाना गश्त कर रही हैं।

रूप सिंह वन्यप्राणी परिक्षेत्र अधिकारी के दिशा निर्देश अनुसार एवं श्रीमान गोपाल नेगी जी वन खंड अधिकारी के नेतृत्व में रात्रि में रकछम छितकुल वन्यजीव अभ्यारण्य स्थल में गश्त और नाके लगाए जा रहे हैं। जिसका मुख्य उद्देश्य वनो और वन्यप्राणियों के संरक्षण के प्रति निगरानी रखना है ।

अशोक कुमार आईएफएस उपअरण्यपाल सराहन वन्यप्राणी मंडल ने बताया कि सर्दी के मौसम में जंगलों में वन्यप्राणियों के नुक्सान एवं वन संपदा के चोरी होने का खतरा अधिक रहता है। क्योंकि जब जब हायर रेंजइस में बर्फ़बारी होती है तो वन्यजीव निचले स्थानों की ओर माइग्रेट करते हैं जिससे वन्यजीव और मानव संघर्ष का खतरा बढ़ जाता है , वन्यप्राणियों के संरक्षण के लिए यह रात्रि गस्त बहुत आवश्यक है इसलिए वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की रात को पेट्रोलिंग एवं नाका लगाने के लिए ड्यूटी लगाई गई है। इसमें वन रक्षक से लेकर वन खंड अधिकारी, वन परिक्षेत्र अधिकारी अलग-अलग टीमों में शामिल होकर गश्त कर रहे हैं। टीमों का मार्गदर्शन करने के लिए वह भी पेट्रोलिंग में रात को शामिल हो रहे हैं।।

*टीम के सदस्य*

संतोष ठाकुर ,वन खंड अधिकारी , इंचार्ज रकछम।

छायानन्द , वनरक्षक बटशेरी बीट ।

पवन कुमार , वनरक्षक छितकुल बीट।

कुमारी अल्पना , वनमित्र रकछम बीट।

श्द्प्रकाश , वनमित्र बटशेरी बीट

कुमारी सोनिया , वनमित्र छितकुल।

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