शिमला। शिमला की सस्टेनेबल एडवेंचर एंड ईको टूरिज्म सोसाइटी द्वारा हाल ही में एक विशेष बर्डवॉचिंग गतिविधि का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य युवाओं को प्रकृति के करीब लाना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। इस पहल के माध्यम से प्रतिभागियों को स्थानीय जैव विविधता, पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने प्राकृतिक वातावरण में पक्षियों का अवलोकन किया और विशेषज्ञों से उनके व्यवहार, आवास और पर्यावरणीय महत्व के बारे में सीखा। सोसाइटी के सदस्यों ने बताया कि इस तरह की गतिविधियां लोगों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी पैदा करती हैं।
सोसाइटी के प्रतिनिधियों ने कहा कि शिमला और आसपास के क्षेत्रों में सस्टेनेबल तथा नेचर-बेस्ड टूरिज्म की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। बर्डवॉचिंग, नेचर वॉक, ट्रैकिंग और ईको-टूरिज्म जैसी गतिविधियां न केवल पर्यटकों को आकर्षित कर सकती हैं, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन गतिविधियों को जिम्मेदारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ बढ़ावा दिया जाए, तो यह पर्यावरण संरक्षण और जंगलों की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
सोसाइटी के प्रेसिडेंट साजिद ने बताया कि संस्था का मुख्य उद्देश्य युवाओं को प्रकृति, पर्यटन और सस्टेनेबल प्रैक्टिसेज़ के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति नेचर-बेस्ड एक्टिविटीज़ सीखना चाहता है या इस क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त करना चाहता है, वह सोसाइटी से जुड़ सकता है। संस्था युवाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण और प्रकृति संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से नए अवसर उपलब्ध करवाने का प्रयास कर रही है।
आयोजकों ने कहा कि जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देकर शिमला के पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा दी जा सकती है। उनका मानना है कि सस्टेनेबल प्रैक्टिसेज़ को अपनाकर पर्यटन विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां न केवल लोगों को प्रकृति से जोड़ती हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण का सकारात्मक संदेश भी देती हैं।