उप-मण्डल की दूर पार स्थित निहरी तहसील की घड़ोई पंचायत में प्राकृतिक बागबानी पर आधारित एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया।शिविर की अध्यक्षता घड़ोई पंचायत की युवा प्रधान जया शर्मा ने की।कार्यक्रम में बागबानी विभाग करसोग की उद्यान विकास अधिकारी डाक्टर चमेली नेगी ने प्राकृतिक बागवानी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारे शरीर को कार्य करने के लिए शक्ति की आवश्यकता होती है।यह शक्ति हमें भोजन से प्राप्त होती है।अतः हमें इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि भोजन कैसा हो?इसके लिए पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ भोजन का विषमुक्त होना भी बहुत जरूरी है।विषमुक्त भोजन के लिए हमें सुभाषपालेकर प्राकृतिक बागवानी और खेती के बारे में जानना भी बहुत जरुरी है।प्राकृतिक बागवानी अपनाने से ज़हरीले रसायनों के कारण दूषित हुई जमीन फिर आबाद हो सकती है।डाक्टर चमेली नेगी ने प्राकृतिक बागवानी के विभिन्न कार्यों पर प्रकाश डाला और बागवानों और किसानों से प्राकृतिक बागवानी अपनाने का आग्रह किया।
घड़ोई पंचायत की प्रधान जया शर्मा ने बागवानी विषय विशेषज्ञ डाक्टर चमेली नेगी का घड़ोई जैसी नितांत दूर
दराज की पंचायत में सुभाषपालेकर प्राकृतिक खेती पर आधारित बागवानी शिविर के आयोजन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती हमारी राष्ट्रीय विरासत का एक अभिन्न अंग है।हमारी प्राचीन विरासत अमूल्य और अद्भुत है।इसकी हर हाल में रक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने उद्यान विकास अधिकारी डाक्टर चमेली नेगी और समाजसेवी मास्टर ट्रेनर लीना शर्मा के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि समाज को समर्पित सुभाषपालेकर प्राकृतिक खेती व बागबानी से नई पीढ़ी को लाभान्वित करने के इनके प्रयास बहुत सराहनीय हैं।
सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती की जिला सलाहकार व मास्टर ट्रेनर लीना शर्मा का ने प्राकृतिक खेती व बागवानी में प्रयोग में लाए जाने वाले जीवामृत और घनजीवामृत का मौके पर निर्माण कर इसके प्रयोग की विस्तृत जानकारी प्रदान की।लीना शर्मा ने शिविर में 40 लिटर पानी,2 किलोग्राम देसी गाय का गोबर, डेढ़ लिटर देसी गाय का मूत्र,250 ग्राम गुड़,250 ग्राम बेसन,एक मुट्ठी मेढ़ की मिट्टी लेकर इन सभी सामग्रियो को लेकर अच्छी तरह से एक टंकी में घोलकर 2-3 मिनट तक घड़ी की दिशा में घोलकर इस टंकी को जूट की बोरी से ढककर छाँव मे रख कर हर रोज 3 मिनट सुबह और तीन मिनट शाम की लकड़ी के डंडे से गोला जाए।7 दिन में यह घोल तैयार हो जाता है।जीवामृत तैयार करने का प्रयोगात्मक प्रशिक्षण प्रदान करने के साथ घन जीवामृत का भी निर्माण किया गया।इस शिविर में घड़ोई पंचायत के बागवानों,पंचायत पदाधिकारियों महिलाओं युवकों ने भाग लेकर सुभाषपालेकर प्राकृतिक बागवानी प्रशिक्षण का लाभ उठाया।