आज मौनी अमावस्या है, जिसमें मौन व्रत रखते हुए पवित्र नदियों में स्नान और दान किया जाता है। धर्मग्रंथों के अनुसार माघ माह में आने वाली मौनी अमावस्या को आत्मसंयम की साधना के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन प्रजापति ब्रह्माजी ने मनु और शतरूपा को प्रकट करके सृष्टि की रचना की शुरुआत की थी। इसलिए यह तिथि सृष्टि की रचना के शुभारंभ के रूप में भी जानी जाती है। इस दिन मौन धारण करके स्नान, दान, तप और शुभ आचरण करने से उपासक को मुनिपद की प्राप्ति होती है। सनातन धर्म में मौनी अमावस्या पर कुछ नियम बताए गए हैं जिनको अपनाकर आप सुख-समृद्धि की ओर बढ़ते हैं।
मौ⁹नी अमावस्या के दिन करें ये उपाय
1- शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन सभी पवित्र नदियों और पतितपाविनी मां गंगा के जल में भगवान विष्णु का वास होता है। इस दिन गंगा स्नान करने से अश्वमेघ यज्ञ करने के समान फल मिलता समान है।
2- यदि किसी व्यक्ति का सामर्थ्य त्रिवेणी के संगम अथवा अन्य किसी तीर्थ स्थान पर जाने की नहीं है तब उसे अपने घर में ही प्रात: काल उठकर सूर्योदय से पूर्व स्नान आदि करना चाहिए और गंगा जल ग्रहण करें।