केंद्र की बीजेपी के नेतृत्व में मोदी सरकार द्वारा जो न्यूजीलैंड, अमेरिका व अन्य देशों के साथ जो व्यापार समझौते किए जा रहे हैं उसमें कृषि उत्पादों पर टैरिफ घटाया जा रहा है जिससे देश के किसानों को भारी नुकसान होगा। सेब पर टैरिफ कम करने से सस्ता विदेश सेब देश में आने से हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर व उत्तराखंड के करीब 15 लाख परिवारों की आजीविका व रोज़ी रोटी पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
हाल ही में मोदी सरकार द्वारा न्यूजीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौता(FTA) को लेकर जो अंतिम वार्ता हो गई है उसमें सेब पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटा कर 25 प्रतिशत कर दिया गया है और नाशपाती पर 16.5 प्रतिशत और कीवी पर शून्य टैरिफ कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त अमेरिका के साथ भी जो द्विपक्षीय व्यापार समझौता(BTA) किया जा रहा है उसकी वार्ता भी अंतिम चरण में है और उसमें भी सेब पर टैरिफ 25 प्रतिशत से भी कम यानी शून्य तक करने की चर्चा की जा रही है। इसके साथ ही जब भारत सरकार अन्य देशों जैसे तुर्की, ईरान, चीन आदि देशों से व्यापार समझौतों को लेकर आगे बढ़ेगी तो सेब पर टैरिफ कम करने से सेब की खेती का संकट और गंभीर हो जाएगा और लाखों किसान परिवारों की रोज़ी रोटी खत्म हो जाएगी।
अमेरिका, न्यूजीलैंड आदि विकसित देशों में सरकार द्वारा किसानों को भारत से कई गुणा अधिक सब्सिडी दी जाती है और वहां सेब की उत्पादकता औसतन 70 से 80 टन प्रति हेक्टेयर है। जबकि भारत में ये केवल 6 से 8 टन प्रति हेक्टेयर है। विकसित देशों में सरकार द्वारा अधिक सब्सिडी व अधिक उत्पादकता से सेब की लागत कीमत कम होने से सस्ता सेब पैदा किया जाता है और इसे भारत में कम कीमत पर लाकर डंप किया जाएगा। ऐसे में सस्ते विदेशी सेब से भारत में पैदा होने वाले अधिक लागत कीमत वाले सेब का मुकाबला संभव नहीं है।
हिमाचल किसान सभा, संयुक्त किसान मंच, हिमाचल सेब उत्पादक संघ, प्रोग्रेसिव ग्रोवर्स एसोसिएशन, प्लम ग्रोवर्स एसोसिएशन आदि संगठनों के नेतृत्व ने आज प्रदेश के मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि सेब व अन्य कृषि उत्पादों पर केंद्र सरकार द्वारा टैरिफ घटाने के विरोध में सरकार सभी राजनीतिक दलों के चुने हुए सांसदों व विधायकों, किसानों व बागवानों के संगठनों तथा किसानों को साथ लेकर इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से मिलकर इन व्यापार समझौतों को करते समय पर सेब व अन्य कृषि उत्पादों को इससे बाहर किया जाए और सेब पर टैरिफ कम से कम 100 प्रतिशत किया जाए।
बागवान संगठनों ने मुख्यमंत्री को स्पष्ट किया कि यदि केंद्र की मोदी सरकार व्यापार समझौतों से सेब व अन्य कृषि उत्पादों को बाहर नहीं करती तो मुख्यमंत्री जम्मू कश्मीर की सरकार से बात कर वहां की सरकार व किसानों को साथ लेकर संयुक्त रूप से दिल्ली कूच करने की योजना बनाए और प्रदेश के किसान बागवान भी सरकार के नेतृत्व में दिल्ली कूच करेंगे।
साथ ही किसानों बागवानों के सभी संगठन से अपील है कि सभी मिलकर केंद्र की मोदी सरकार पर सेब व अन्य कृषि उत्पादों को मुक्त व्यापार समझौतों(FTA) से बाहर करने का दबाव बनाने के लिए आंदोलन चलाया जाए और ये तब तक जारी रहेगा जब तक कि केंद्र सरकार अपने निर्णय को वापिस नहीं ले लेती।