मंडी, 31 जुलाई : उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर ने कहा कि मंडी जिला प्रशासन कोरोना संकट से निपटने के लिए सभी सम्भव कदम उठा रहा है। प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंडी शहर में कोरोना संक्रमण के मामलों से घबराएं नहीं, ये सभी पहले पॉजिटिव आए लोगों के प्राथमिक सम्पर्क हैं। और ये मामले प्रशासन की गहन कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग मुहिम के चलते सामने आए हैं। फिलहाल प्रशासन का सारा ध्यान संक्रमण को फैलने से रोकने पर है। इसमें आप सभी का सहयोग जरूरी है।
उन्होंने बताया कि 30 जुलाई को मंडी जिला में कोरोना संक्रमण के 24 नए मामले आए हैं। इनमें से 16 मामले मंडी शहर के हैं। ये सभी मामले प्रशासन की गहन कॉंटैक्ट ट्रेसिंग मुहिम के चलते सामने आए हैं, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है।
राम नगर में आए सभी 11 मामले पहले पॉजिटिव आए व्यक्ति के प्राथमिक संपर्क हैं और सभी कंटेनमेंट जोन से हैं। इसके अलावा शहर की अन्य जगहों से आए 5 मामले भी पहले के पॉजिटिव मामलों के प्राथमिक संपर्क हैं। अन्य 8 मामले गोहर और बल्ह क्षेत्र के हैं । इनमें 5 गोहर के हैं, वे भी पहले के पॉजिटिव मामलों के प्राथमिक संपर्क हैं। 3 मामले बल्ह उपमंडल के हैं। इनमें 2 सेना के जवान हैं, जो राज्य के बाहर से आए हैं। वहीं एक व्यक्ति संस्थागत क्वारंटाइन में था, वह भी पॉजिटिव आया है।

व्यापक पैमाने पर सैंपलिंग
उपायुक्त ने जोनल अस्पताल मंडी में कोरोना संक्रमण के मामलों पर कहा कि अस्पताल के सभी लोगों के सैंपल लिए जा रहे हैं। क्योंकि पहले पॉजिटिव आए लोग अस्पताल में कईयों के प्रत्यक्ष-अप्रप्यक्ष संपर्क में आए हैं, इसलिए प्रशासन ने सभी की सैंपलिंग का निर्णय लिया है।
जोनल अस्पताल में कुल 429 का स्टाफ है। इनमें 324 जोनल अस्पताल के कर्मी हैं बाकी सीएमओ ऑफिस के हैं। 324 में से 222 के सैंपल लिए जा चुके हैं। इनमें केवल 4 पॉजिटिव आए हैं। सैंपलिंग की प्रक्रिया व्यापक पैमाने पर चली है।
वहीं अस्पताल के स्त्री रोग वार्ड में एक नर्स के पॉजिटिव पाए जाने के बाद बाद वार्ड के सभी 25 कर्मियों की सैंपलिंग की गई है, सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। इसके उपरांत वार्ड में भर्ती रोगियों की भी सैंपलिंग की गई, जिसमें दुर्भाग्यवश एक महिला पॉजिटिव आई थी, जिसे नेरचौक अस्पताल शिफ्ट किया गया है।
डॉक्टर-स्टाफ की हिम्मत को दाद
ऋग्वेद ठाकुर ने सभी डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ और सफाई कर्मियों के हौंसले और कर्तव्य निष्ठा की भावना की सराहना करते हुए कहा कि अस्पताल में कोरोना संक्रमण के मामले आने पर भी डॉक्टर और पूरा स्टाफ काम में लगे हैं ताकि कोई भी मरीज उपचार से वंचित न रहे। पॉजिटिव केस आने पर मानक प्रोटोकाल के अनुरूप कदम उठाए जा रहे हैं।
परिस्थितियों के अनुरूप लिया जाता है कंटेनमेंट जोन का फैसला
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि कन्टेनमैंट जोन कोरोना के मामले को देखते हुए ही घोषित किया जाता है। पॉजिटिव मामाला आने पर वह व्यक्ति कितने लोगों से मिला, उसके परिवार के सदस्य किन-किन से मिले इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए कन्टेनमैन जोन बनाया जाता है। उसके साथ ही उस क्षेत्र में किन-किन रास्तों को बन्द किया जा सकता है, पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था के अनुरूप कन्टेनमैंट जोन की रूपरेखा तैयार की जाती है। हमारा उद्देश्य होता है कि कन्टेनमेंट जोन में कम से कम क्षेत्र कवर किया जाए ताकि ज्यादा लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

आवश्यकतानुसार कन्टेनमेंट के लिए एक घर, आस-पास के घरों को कन्टेनमेंट के लिए लिया जाता है और इसे बढ़ाकर 50 घर, वार्ड, एक पंचायत तक को कवर किया जा सकता है। कंटेनमेंट को लेकर व्यवहारिक निर्णय लिया जाता है।
जोगिन्द्रनगर का एक मामला था जिसमें एक परिवार के तीन सदस्य बाहर से आए और एक घर में ही रहे और उनका किसी से घर के नजदीक सम्पर्क नहीं रहा तो उस परिस्थिति में केवल एक घर को ही कन्टेनमैंट जोन बनाया गया ।
वहीं एक मामला ऐसा है जिसमें व्यक्ति ने बाहर से आकर स्वयं को घर पर क्वारंटाईन किया परन्तु उसके बच्चों पड़ोस में अन्य बच्चों के साथ खेलते रहे। अगर होम क्वारंटाइन अच्छे से किया हो तो वायरस के फैलने की संभावना नहीं है। परन्तु प्रशासन किसी तरह का कोई रिस्क नहीं उठा सकता इसलिए ऐसी परिस्थिति में उस क्षेत्र में सैकेण्डरी सम्पर्क न बने इसलिए भी कन्टेनमेंट क्षेत्र को बढ़ाया जाता है।
उपायुक्त ने कहा कि जो एरिया कन्टेनमेंट नोटिफाई होता है वहां पर जिस दिन पॉजिटिव मामला है उस दिन से लेकर 14 दिन तक गिना जाता है। और 14 दिन तक यदि उस क्षेत्र में कोई पॉजिटिव मामला नहीं आता है तो उस क्षेत्र को कन्टेनमेंट से बाहर कर दिया जाता है।

उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि कंटेनमेंट जोन के बड़े व छोटे होने को लेकर कयास न लगाएं, यह निर्णय लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर मामले व परिस्थिति के अनुरूप लिया जाता है। यदि कन्टेनमेंट जोन को लेकर किसी व्यक्ति को कोई परेशानी हो तो वह सीधे प्रशासन से सम्पर्क स्थापित कर सकता है ताकि उस क्षेत्र में कन्टेनमेंट को लेकर विचार किया जा सके।
मंडी शहर में वर्तमान में लॉकडाउन का नहीं कोई औचित्य
उपायुक्त ने शहर में लॉकडाउन लगाने के विचार को लेकर पूछे प्रश्न पर स्पष्ट किया कि वर्तमान में मंडी शहर में लॉकडाउन का कोई औचित्य नहीं है। सुरक्षा की दृष्टि से कन्टेनमैंट जोन को प्रत्येक मामले के आधार पर बढ़ाया जा सकता है। लॉकडाउन जैसे फैसले राज्य स्तर पर ही लिए जाते हैं। हमारी तरफ से लॉकडाउन को कोई भी फैसला नहीं लिया जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि कोरोना संक्रमण को लेकर जो भी निर्णय लिया जाता है उसका कुछ औचित्य होना चाहिए। राष्ट्रीय स्तर पर जो पहला लॉकडाउन लगाया गया था उसका उद्धेश्य था कि वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को और अधिक सुदृढ़ करना, ताकि हम किसी भी परिस्थिति में तुरन्त कार्रवाई करने के लिए तैयार रहें। साथ ही लॉकडाउन लोगों को जागरूक करने के लिए लगाया गया था।
वर्तमान में मंडी शहर में लॉकडाउन का कोई औचित्य नहीं है। बेहतर है लोग स्वयं बाहर आने से परहेज करें। स्व अनुशासन अपनाएं। जिन्हें बाहर आने की जरूरत नहीं है, वे अनावश्यक बाहर न आएं। जिन लोगों को जरूरत है, लेबर क्लास और गरीब लोगों को अपने काम धंधे चले हैं, उनकी गतिविधियां जारी रहें। जहां जरूरत होगी लोगों की सुरक्षा के लिए प्रशासन उपयुक्त कदम उठाएगा।
उन्होंने लेागों से आग्रह किया फेस कवर-सोशल डिस्टेंसिंग-हैण्ड वॉश ये बचाव का सबसे कारगर उपाय हैं, इन्हें अपनाएं। कोरोना के खिलाफ इस युद्ध में आप सभी के सहयोग से विजय सम्भव है।