सोलन दिनांक 18.02.2020
पूर्व गर्भाधान एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम (पीसी एण्ड पीएनडीटी एक्ट) के अन्तर्गत जिला स्तरीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन आज यहां किया गया। कार्यशाला में ज़िला के सरकारी संस्थानों के चिकित्सकों, रेडियोलाॅजिस्टों, स्त्री रोग विशेषज्ञों तथा निजी स्तर पर कार्यरत चिकित्सकों ने भाग लिया।
कार्यशाला में पूर्व गर्भाधान एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम के राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी एवं स्वास्थ्य सुरक्षा एंव विनियमन निदेशालय में ओएसडी डाॅ. महेश जसवाल ने अधिनियम के विभिन्न प्रावधनों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की।
डाॅ. जसवाल ने सभी से आग्रह किया कि इस अधिनियम की पूर्ण अनुपालना सुनिश्चित बनाएं तथा लोगों को इस विषय में जागरूक बनाएं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. राजन उप्पल ने कहा कि इस कार्यशाला का आयोजन बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान के तहत किया जा रहा है। उन्हांेने अवगत करवाया कि लिंग अनुपात में कमी एक चिन्ताजनक विषय है तथा गिरते लिंग अनुपात तथा कन्याओं को भ्रूण हत्या से बचाने के लिए इस अधिनियम की जानकारी होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम के तहत जन्म से पूर्व शिशु के लिंग की जांच पर पूर्ण पाबंदी है। अल्ट्रासांऊड क्लीनिकों की नियमित जांच के दौरान अगर अनियमितता पाई जाती है तो अल्ट्रासांऊड करवाने वाले व्यक्तियों या करने वाले चिकित्सक, लैब कर्मी को सजा, जुर्माना तथा मशीन को भी जब्त करने का प्रावधान है।
उन्होने कार्यशाला में भाग ले रहे चिकित्सकों, रेडियोलाजिस्टों, स्त्री रोग विशेषज्ञों तथा निजी स्तर पर कार्यरत चिकित्सकों का आह्वान किया कि जब भी कोई गर्भवती महिला लिंग जांच करवाने आए तो उन्हें इस विषय में जागरूक करें कि लिंग जांच कानूनी अपराध ही नही अपितु एक सामाजिक बुराई भी है।
कार्यशाला में जिला न्यायवादी एम.के शर्मा, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. एन. के गुप्ता, खण्ड चिकित्सा अधिकारी डाॅ. उदित, सहित विभिन्न निजी चिकित्सक एवं अन्य उपस्थित रहे।

