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सोलन            दिनांक 18.02.2020

जल शक्ति, बागवानी एवं सैनिक कल्याण मंत्री महेन्द्र सिंह ठाकुर ने कृषि एवं बागवानी वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे फलों एवं पुष्पों की ऐसी किस्में तैयार करें जो हिमाचल की जलवायु के अनुरूप हों और कीटरोधी हों। महेन्द्र सिंह ठाकुर आज डा. यशवन्त सिंह परमार, बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, सोलन में ‘प्रेक्टिसिस आॅफ पैकेजिज फाॅर फ्रूट एंड ओर्नामेंटल क्राॅप्स’ विषय पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का शुभारम्भ करने के उपरान्त उपस्थित वैज्ञानिकों एवं बागवानी विभाग के अधिकारियों एवं अन्य को सम्बोधित कर रहे थे।  

उन्होंने इससे पूर्व विश्वविद्यालय में 20 लाख रुपए की लागत से निर्मित पुष्प खेती की क्षेत्रीय प्रयोगशाला एवं विक्रय केन्द्र का लोकार्पण भी किया।
महेन्द्र सिंह ठाकुर ने कहा कि वैश्विक उष्मता के कारण खेती एवं बागवानी पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है और इस कारण वैज्ञानिकों का कार्य भी बढ़ गया है। उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे अपने अनुसंधान के माध्यम से किसानों एवं बागवानों की समस्याओं का समाधान उनके खेत एवं बागीचे में करें। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय को फलदार पौधों की ऐसी सदाबहार किस्में तैयार करनी चाहिएं जो ऊष्णकटिबन्धीय क्षेत्रों के लिए सर्वथा अनुकूल हों। उन्होंने वैज्ञनिकों से सेब की भी ऐसी किस्में तैयार करने का आग्रह किया जो प्रदेश की जलवायु के अनुकूल एवं दीर्घ अवधि में लाभदायक हों।  

बागवानी मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के लिए कृतसंकल्प है। उन्होने कहा कि स्वस्थ और स्वच्छ हिमाचल प्रदेश बनाने के लिए बागवानी एक महत्वपूर्ण साधन है। उन्होने सभी का आह्वान किया कि अपनी कार्यशैली के प्रति अधिक जागरूक तथा परिणामोन्मुखी रहें। मौन पालन व्यवसाय को बागवानी की प्रत्येक परियोजना में शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि यह एक व्यवसाय के साथ-साथ बागवानों की पैदावार बढ़ाने में सहायक है।
महेन्द्र सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में 1134 करोड रुपए की बागवानी विकास परियोजना कार्यान्वित की जा रही है। पायलट परियोजना के तहत प्रदेश सरकार ने सात जिलों के 17 पंचायत समूहों में 1688 करोड़ रुपए की शिवा परियोजना आरम्भ की है। इसके तहत सात जिलों में 70 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इसमें किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। प्रदेश सरकार ने एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) की वित्तीय सहायता से यह परियोजना प्रदेश के उन जिलों में शुरू की है, जो 1134 करोड़ के बागवानी विकास मिशन के तहत नहीं हैं। शिवा प्रोजेक्ट के तहत एडीबी की वित्तीय मदद से कांगड़ा, मंडी, ऊना, हमीरपुर बिलासपुर, सोलन और सिरमौर जिले शामिल किए गए हैं।

उन्होंने उपस्थित सभी बागवानी अधिकारियों से आग्रह किया कि क्षेत्रीय स्तर से कोई भी शिकायत आती है तो अधिकारी स्वयं उस स्थान पर जा कर समस्या का निपटारा करें और लघु एवं सीमान्त किसानों की समस्याओं को समयबद्ध निपटाएं।
विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. परविन्द्र कौशल ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कहा कि यह कार्याधाला 07 वर्ष की अवधि के उपरान्त आयोजित की जा रही है। उन्होने अनुसंधान गतिविधियों के लिए आर्थिक सहायता की मांग भी की।
बागवानी विभाग के सचिव अमिताभ अवस्थी ने कहा कि विश्वविद्यालय का मुख्य कार्य उद्यान एवं वाणिकी के क्षेत्र में नए शोध करना तथा इस विषय में किसान-बागवानों को जागरूक करना है ताकि किसान- बागवानों नई किस्मों को अपनाकर लाभान्वित हो सकंे।  
इस कार्यशाला में निदेशक अनुसंधान जे एन शर्मा, निदेशक विस्तार शिक्षा राकेश गुप्ता सहित बागवानी विभाग के अधिकारी  एवं अन्य उपस्थित थे।

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