शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर देव उत्सव शुरू हो गया है। पालकी के चारों ओर देवलुओें का पारंपरिक वेशभूषा में परंपरागत चोल्टू नृत्य हुआ। 20 साल बाद देवधुन पर यह देवनृत्य पेश किया गया। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। माना जाता है कि डामेश्वर डूम देवता सदियों पहले हिमाचल के सोलन और शिमला क्षेत्र के एक प्रसिद्ध योद्धा थे, जिन्हें देवत्व प्राप्त हुआ।
गौरतलब हो कि इससे पहले शिमला ग्रामीण की लगभग सभी पंचायतों में यह नृत्य देखने को मिला था। शिमला के रिज मैदान पर आज जातर नृत्य का आयोजन के दौरान लोगों का जमावड़ा लगा रहा। बारिश और ओलावृष्टि के बीच देवता का स्वर्ण जड़ित प्रतिमाओं से युक्त रथ रिज पर नृत्य करते दिखा। रथ की परिक्रमा में देवलुओें का पारंपरिक वेशभूषा में परंपरागत चोल्टू नृत्य का आयोजन किया गया। गौरतलब है कि शिमला और सोलन जिलों की 18 ठकुराइयों और 22 रियासतों के प्रमुख देवता डोम सन्नाटा गुठाण की जातर का आयोजन आज रिज मैदान पर किया गया।डोम सन्नाटा देवता गुठाण के प्रमुख कारदार मदन लाल वर्मा ने बताया कि देवधुन पर यह देवनृत्य पारंपरिक रीति है। यह हर 18 साल बाद होता है। इस मौके पर देवता तमाम शिमलावासियों को सुख एवं समृद्धि का आशीर्वाद दिया। इस देव परंपरा को निभाने में सहयोग देने के लिए उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। उल्लेखनीय है कि डोम सन्नाटा सदियों पहले हिमाचल के इस क्षेत्र के एक प्रख्यात योद्धा थे, जिन्हें देवत्व प्राप्त हुआ।