भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने मजबूत वित्तीय परिणामों से बाजार को चौंकाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एलआईसी स्टॉक की “रीरेटिंग’ का कारण बन सकता है। एलआईसी ने सालाना प्रीमियम इक्विवेंट यानी एपीई में 3% की वृद्धि और ग्रुप बिजनेस में 20% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की। नए बिजनेस यानी वीएनबी 12% की वृद्धि हुई है।
ये परिणाम संकेत देते हैं कि आने वाले समय में एलआईसी का प्रदर्शन और भी मजबूत हो सकता है। एलआईसी की स्थापना 1 सितंबर 1956 को भारत में जीवन बीमा के निजीकरण को समाप्त करने और 245निजी कंपनियों के विलय के बाद हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य बीमा को देश के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों तक पहुंचाना था, ताकि लोगों की बचत को राष्ट्र निर्माण में लगाया जा सके। आज एलआईसी के पास 15 लाख एजेंट का नेटवर्क है। यह संख्या भारत में पूरे बीमा उद्योग के कुल एजेंट का 47% है, जो इसकी जबरदस्त पहुंच को दर्शाती है। एलआईसी का एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएमएम) 57 ट्रिलियन यानी 57 लाख करोड़ रुपए से अधिक है, जो इसे भारत का सबसे बड़ा एसेट मैनेजर बनाती है।